प्रेस विज्ञप्ति

08 मई 2020
08-05-2020
08 मई 2020

  • चंडीगढ़, 8 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के वायदे के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा घर जाने के इच्छुक प्रवासी श्रमिकों को अगले सात दिनों में 100 रेलगाडिय़ों व 5000 बसों के माध्यम से उनके गृह राज्यों में नि:शुल्क पहुंचाया जाएगा। प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में भेजने के लिए चलाई जाने वाली रेलगाडिय़ों व बसों का सारा खर्च हरियाणा सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
  • इस संबंध में जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश व पूर्वी उत्तर-प्रदेश के लिए 100 विशेष श्रमिक रेलगाडिय़ां चलाई जाएंगी।
  • उन्होंने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल-प्रदेश, पंजाब और उत्तराखण्ड में 5000 बसों के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में भेजा जाएगा।
  • इसी प्रकार, प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की हर प्रवासी श्रमिक और खेतीहर मजदूर को उनके गृह राज्यों में हरियाणा सरकार की ओर से मुफत भेजने के लिए की गई घोषणा के उपरांत अब तक 23452 ऐसे प्रवासी श्रमिकों को विभिन्न रेलगाडिय़ों व बसों के माध्यम से उनके गृह राज्यों में पहुंचाया जा चुका है।
  • उन्होंने बताया कि अब तक राज्य से 13347 प्रवासी मजदूरों को उत्तर प्रदेश पहुंचाया गया है। इसी प्रकार, उत्तराखण्ड राज्य के 3133 प्रवासी मजदूरों को भेजा गया है, वहीं, 3593 प्रवासी मजदूरों को बिहार भेजा गया है।
  • प्रवक्ता ने बताया कि 2549 प्रवासी श्रमिकों को मध्य प्रदेश, 435 प्रवासी मजदूरों को राजस्थान, 221 प्रवासी मजदूरों को पंजाब, 54 प्रवासी मजदूरों को हिमाचल प्रदेश, 46 प्रवासी मजदूरों को केरल, 32 प्रवासी मजदूरों को असम, 23 प्रवासी मजदूरों को महाराष्ट्र और 19 प्रवासी मजदूरों को गुजरात पहुंचाया जा चुका है।
     
  • चंडीगढ़, 8 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा है कि प्रदेश के सभी निराश्रय पशुओं, विशेषकर गायों और नंदियों को प्रदेश की सभी गौशालाओं में आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से शीघ्र ही प्रदेश के सभी खंडों में 225 पशुधन सर्वेक्षण समितियों का गठन किया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री आज यहां वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित उपायुक्तों, प्रदेश के पशुपालन विभाग के सभी उप-निदेशकों, गौ-रक्षक समितियों के प्रतिनिधियों तथा गौ सेवकों के साथ बैठक कर रहे थे। इस अवसर पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्री जे.पी.दलाल और गीता मनीषी श्री ज्ञानानंद महाराज ने भी बैठक में भाग लिया।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राय: यह देखने में आया है कि सभी गौशालाएं गायों को रखने के लिए तैयार हो जाती हैं परंतु नंदियों को रखने के लिए कोई तैयार नहीं होता। उन्होंने गौशाला संचालकों से आग्रह किया कि वे नंदियों को आश्रय प्रदान करने के लिए अलग से नंदी शालाएं बनाएं।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच सदस्यों वाली इन खंड स्तरीय समितियों की अध्यक्षता वेटरनरी सर्जन करेंगे और इसके अन्य सदस्यों में गौ-सेवा आयोग के प्रतिनिधि, क्षेत्र की प्रमुख गौशाला के संचालक और जिला उपायुक्त के स्तर पर दो समाजसेवी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर इन समितियों की निगरानी पशुपालन विभाग के उप-निदेशक करेंगे। और उन्हें सदस्यों की संख्या पांच से छ: करने का भी अधिकार होगा।
  • इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग में उपस्थित उपायुक्तों, प्रदेश के पशुपालन विभाग के सभी उप-निदेशकों, गौ-रक्षक समितियों के प्रतिनिधियों तथा गौ सेवकों से बातचीत में गौशालाओं में पशुधन की संख्या व निराश्रय गौधन व नंदियों की संख्या के बारे में जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में निराश्रय पशुओं की संख्या, विशेषकर गाय और नंदी काफी संख्या में है, जो सडक़ों पर घूमते हैं और चारे के आभाव में पॉलीथिन व अन्य अपशिष्ट पदार्थ खाकर बीमार हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह खेतों में घूमकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं और इनकी वजह से अक्सर सडक़ों पर दुर्घटनाएं भी होती हैं।
  • उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 600 गौशालाएं हैं। मुख्यमंत्री ने गौ-रक्षक समितियों के प्रतिनिधियों व गौ सेवकों से आग्रह किया कि इन गौशालाओं में निराश्रय पशुओं, विशेषकर गायों और नंदियों को आश्रय प्रदान करने के लिए सरकार के मार्गदर्शन में सुचारू रूप से व्यवस्था बनाने में अपना सहयोग दें। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं गौशाला नहीं चलाएगी बल्कि गौशालाओं का संचालन करने वालों को अनुदान प्रदान करेगी और अपनी तरफ से हर संभव सहायता प्रदान करेगी तथा इसी उद्देश्य के चलते पशुधन सर्वेक्षण समितियों का गठन किया जा रहा है।
  • श्री मनोहर लाल ने कहा कि इस कार्य के लिए सरकार द्वारा सभी गौशालाओं को अनुदान राशि प्रदान की जाएगा। उन्होंने कहा कि अनुदान की राशि उपयोगी और अनुपयोगी पशुओं के अनुपात के अनुसार ही प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार 33 प्रतिशत से कम अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को कोई सरकारी अनुदान प्रदान नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 33 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 100 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। 51 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 200 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। 76 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 300 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा शत-प्रतिशत यानि 100 प्रतिशत अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 400 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल नंदियों को ही रखने वाली गौशालाओं/नंदी शालाओं को प्रति वर्ष 500 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नंदी और अनुपयोगी गायों को सम्मलित रूप से रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 400 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पशुधन सर्वेक्षण समितियों का पहला कार्य अपने-अपने क्षेत्रों में गौशालाओं, गौशालाओं से बाहर निजी तौर पर अपने-अपने घरों में रखे जाने वाले गौधन, विशेषकर गायों और नंदियों की संख्या की गणना तथा उपयोगी व अनुपयोगी मापदंडों को तय करना, गौशालाओं के लिए जमीन की आवश्कता की संभावनाएं तलाशना होगा। उन्होंने कहा कि चारे के लिए गौशालाएं पट्टे पर ग्राम पंचायतों की गौ-चरण भूमि का उपयोग कर सकती हैं, यदि गौशाला उसी ग्राम पंचायत की है तो 5000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष और दूसरी ग्राम पंचायत की है तो 7000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से देनी होगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पडऩे पर शहरी क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकाय विभाग शहर के बाहरी क्षेत्र में तथा पंचायत विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में गौशालाओं के लिए जमीन उपलब्ध करवाएगा।
  • श्री मनोहर लाल ने कहा कि सभी उपयोगी व अनुपयोगी गौधन की अलग-अलग रंग से टैगिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह उपयोगी व अनुपयोगी की श्रेणी समय के साथ परिवर्तित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सभी वेटरनरी सर्जन सांझा सेवा केन्द्रों के माध्यम से गौधन का डाटा जुटाकर ऑनलाइन अपडेट करेंगे। उन्होंने कहा कि चाहे कोई गौशाला सरकारी अनुदान ले अथवा न ले, सभी को पशुपालन विभाग के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा।
  • बैठक में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव श्री वी. उमाशंकर, पशुपालन एवं डेरी विभाग के प्रधान सचिव श्री राजा शेखर वुंडरू, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव श्री सुधीर राजपाल, पशुपालन एवं डेरी विभाग के महानिदेशक डॉ० ओ.पी.छिक्कारा के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
     
  • चंडीगढ़, 8 मई- वैसे तो हर आदमी को अपना घर प्यारा होता है। लेकिन इसके बावजूद कुछ न कुछ बेहतर करने की चाहत और रोजी-रोटी की तलाश में बहुत-से लोगों को अपना घर-बार छोडक़र दूसरी जगह जाना पड़ता है। लेकिन कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि प्रवास में रहते हुए भी उसे रोजी-रोटी का संकट हो जाता है।
  • कोरोना वायरस के चलते आज देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उद्योग-धन्धे ठप्प होकर रह गए हैं। कोविड-19 पर काबू पाने को देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के चलते जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, वे हैं प्रवासी मजदूर। हरियाणा में भी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में आए थे। इनमें से कुछ फैक्ट्रियों में लगे हुए थे तो कुछ भवन निर्माण जैसी गतिविधियों से जुडक़र हरियाणा की तरक्की में अहम योगदान दे रहे थे। लेकिन लॉकडाउन के दौरान जब इनकी रोजी-रोटी पर संकट आया तो सरकार का चिंतित होना लाजमी था।
  • ऐसे में मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने जिला प्रशासन समेत पूरी सरकारी मशीनरी को हिदायत दी कि लॉकडाउन के दौरान न केवल हर मजदूर के रहने और खाने-पीने का उचित प्रबंध किया जाए बल्कि प्रवासी मजदूरों को किसी भी हाल में यह महसूस न होने पाए कि वे अपने घर और ‘अपनों’ से कोसों दूर हैं। यही कारण था कि पूरे प्रदेश में बनाए गए शैल्टर होम्स में मजूदरों के रहने और खाने-पीने के पूरे इंतजामात किए गए और इस बात का पूरा ख्याल रखा गया कि हमारे इन ‘मेहमानों’ को कोई तकलीफ न हो।
  • लॉकडाउन के तीसरे चरण में जब केन्द्र सरकार ने कुछ ढील दी और इन मजूदरों की अपने घर वापसी की सम्भावनाएं बनी तो हरियाणा सरकार ने फिर से सक्रियता दिखाते हुए इन मजदूरों के घर लौटने का प्रबंध किया। इसी कड़ी में हिसार के रेलवे स्टेशन से भी लगातार दो दिन तक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से 2400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को बिहार पहुंचाया गया है। जिला प्रशासन ने जिस आत्मीयता और अपनत्व के साथ इन ‘मेहमानों’ को उनके घरों के लिए रवाना किया, उससे हर किसी का भाव-विभोर हो जाना लाजमी है।
  • हिसार के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 पर एक प्रवासी मजदूर अपनी लगभग 6 वर्षीय बच्ची को कंधे पर बैठाए प्लेटफार्म की ओर चला जा रहा था। तभी रेलवे स्टेशन पर कोई मिलता है और बच्ची को स्नेह के साथ बार्बी डॉल और कुछ चॉकलेट देकर दोबारा आने का भावपूर्ण न्योता देता है। तभी एक टीम बच्ची को दुलारते हुए उस श्रमिक को खाने का पैकेट, पानी की बोतल और टिकट देती है। यह सुखद अनुभव केवल इस एक श्रमिक को नहीं बल्कि यहां से बिहार के लिए रवाना किए गए हर कामगार के जीवन को छूता चला गया। यहां से ट्रेन की सीटी बजने के साथ ही इन श्रमिकों ने भावपूर्ण ढंग से हाथ हिलाकर, ताली बजाकर और न जाने धन्यवाद के कितने तरीकों से उनके रहने और खाने-पीने के प्रबंधों में तमाम अधिकारियों-कर्मचारियों का आभार जताया।
  • दरअसल, श्रमिकों को इस प्रकार का ट्रीटमेंट देने और उन्हें सुखद अहसास करवाने के पीछे हिसार की जिला उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी का अहम योगदान रहा। उपायुक्त ने जिला रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से तमाम प्रबंध करवाए। उन्हें यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि हमें उनकी भावनाओं की, उनकी जरूरतों की और उनकी मुश्किलों की फिक्र है। यही कारण है कि वापस अपने गृहराज्य जाने वाले श्रमिक खास होने के अहसास से भर उठे। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के भावपूर्ण निमंत्रण और अपनेपन से भरे व्यवहार ने उन तमाम प्रवासी मजदूरों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि हरियाणा से उनका नाता एक ‘नियोक्ता और श्रमिक’ से कहीं बढकऱ है और उनका सुख-दुख हर हरियाणवी का सुख-दुख है। उम्मीद हरियाणा सरकार और प्रदेशवासियों का अपनत्व का यह व्यवहार हालात सामान्य होने के बाद इन तमाम प्रवासी मजदूरों को फिर से हरियाणा का रुख करने के प्रेरित करेगा।
     
  • चंडीगढ़, 8 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा है कि राज्य सरकार इच्छुक प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कड़ी में हरियाणा से आज तीन विशेष श्रमिक रेलगाडिय़ों में लगभग 2520 प्रवासी श्रमिकों को बिहार और लगभग 1200 प्रवासी श्रमिकों को मध्य प्रदेश भेजा गया है।
  • उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने लॉकडाउन में फंसे और अपने घर जाने के इच्छुक प्रवासी श्रमिकों को राज्य सरकार के खर्च पर उनके गृह राज्यों में भिजवाने की पहल की है, जिसके तहत इन प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में विशेष श्रमिक रेलगाडिय़ों व बसों के माध्यम से भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी भाग में रहने वाले सभी भारतीय एक हैं और इनकी दुख-तकलीफ को दूर करना हम सब भारतीयों का दायित्व है। इसके अलावा, इन प्रवासी श्रमिकों का हरियाणा की उन्नति में उल्लेखनीय योगदान भी है।
  • -रेवाड़ी से सागर (मध्य प्रदेश) के लिए रवाना हुई रेलगाड़ी-
  • रेवाड़ी जक्ंशन से आज लगातार दूसरे दिन प्रवासी श्रमिकों को लेकर मध्यप्रदेश के सागर तक के लिए विशेष श्रमिक रेलगाड़ी रवाना हुई। इस स्पेशल ट्रेन में जिला रेवाड़ी में रह रहे 1122 प्रवासी श्रमिकों और पानीपत जिला के 78 श्रमिकों को मध्यप्रदेश के सागर भेजा गया है। इसके अलावा, इन सभी प्रवासी श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच भी गई हैं तथा सोशल डिस्टेंसिंग इत्यादि को बनाए रखा गया हैं।
  • - रोहतक से कटिहार (बिहार) के लिए रवाना हुई रेलगाड़ी-
  • इसी प्रकार, रोहतक से कटिहार (बिहार) 1204 प्रवासी श्रमिकों को विशेष श्रमिक रेलगाड़ी के माध्यम से भेजा गया हैं। इस रेलगाड़ी से रोहतक से कटिहार जाने वालों में यमुनानगर से 42, कुरूक्षेत्र से 280, करनाल से 26, सोनीपत से 163, पलवल से 37, रोहतक से 308, गुरूग्राम से 341 व पानीपत से 7 प्रवासी श्रमिक शामिल हैं। सभी श्रमिक बिहार के अररिया, कटिहार, मधेपुरा, पुर्णिया, सहरसा व सुपोल के रहने वाले हैं।
  • -अंबाला से भागलपुर (बिहार) के लिए रवाना हुई रेलगाड़ी-
  • उधर, अम्बाला छावनी के प्लेटफार्म नम्बर तीन से लगभग 1316 प्रवासी श्रमिकों को भागलपुर (बिहार) भेजा गया। इस ट्रेन में बिहार के खगडिया, मुंगेर, पश्चिमी चम्पारण, बेगूसराय व भागलपुर जिलों के प्रवासी श्रमिक हैं। इनमें अम्बाला, जींद, नारनौल, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, हिसार, दादरी, रोहतक, झज्जर, गुरूग्राम, हांसी व मेवात के वे श्रमिक शामिल हैं, जो लॉक डाउन में गेहूं की कटाई के लिए इन स्थानों पर रूके हुए थे। प्रदेश सरकार द्वारा सभी श्रमिकों को नि:शुल्क भेजने का काम किया जा रहा है। आज अम्बाला से 85, झज्जर से 173, करनाल से 20, नारनौल से 102, सोनीपत से 12, कुरुक्षेत्र से 196, भिवानी/तोशाम से 121, रोहतक से 76, जींद से 404, चरखी दादरी से 50, पानीपत से 37, गुरुग्राम से 8, यमुनानगर से 3, फरीदाबाद से 2, मेवात से 3 और हिसार से आए 24 प्रवासी श्रमिकों को भेजा गया है।
  • -हरियाणा सरकार द्वारा प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं सुविधाएं-
  • आज हरियाणा के इन रेलवे स्टेशनों पर सामाजिक दूरी बनाए रखने हेतु सर्किल लगाए गए। प्रवासी श्रमिकों हेतु रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार पर मास्क, सेनिटाइजर व खाने-पीने का प्रबंध भी किया गया। यह सभी प्रवासी श्रमिक विभिन्न जिलों से बसों द्वारा राज्य के संबंधित रेलवे स्टेशनों पर लाए गए। रेलवे स्टेशन पर प्रवासी श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच करने के उपरांत उन्हें संबंधित प्रशासन के स्टॉफ सदस्यों द्वारा उनकी बोगियों तक छोड़ा गया ताकि व्यवस्था बनी रहे।
  • -स्पेशल ट्रेनों में लगे हरियाणा सरकार जिंदाबाद के नारे-
  • स्पेशल ट्रेनों में बैठने के बाद प्रवासी श्रमिकों से जब बात की गई, तो वे पूरे जोश व उत्साह के साथ बोले- हरियाणा सरकार ने बिना कोई खर्च घर तक पंहुचाने की व्यवस्था की है। इसके अलावा हरियाणा सरकार ने खाना-पानी और रास्ते का भोजन भी दिया है। हरियाणा सरकार ने घर पंहुचने का सपना साकार कर दिया है, लगता नहीं था कि ट्रेन में बैठकर घर जा पाएंगे। श्रमिकों ने हाथ उठाकर बोला हरियाणा सरकार अच्छी है, हरियाणा सरकार जिंदाबाद।
  • -प्रवासी श्रमिकों का हुआ सपना साकार-
  • अम्बाला रेलवे स्टेशन पर पहुंचे प्रवासी श्रमिक रामगोपाल, रामशरण, मोहन पासवान, निर्मल यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें भेजने की जो नि:शुल्क व्यवस्था की गई है, वो राज्य सरकार का बहुत ही सराहनीय कदम है और इसी कारण आज वे अपने घर के लिए सकुशल रवाना हो सकें हैं। आज उन्हें बहुत खुशी मिल रही है। इसी प्रकार, प्रवासी श्रमिक सुनीता देवी, रेखा व संजय कुमार ने बताया कि उन्हें यहां से सकुशल भेजा जा रहा है, वहीं उन्हें रास्ते के लिए खाना व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए भी वे हरियाणा सरकार का तहेदिल से धन्यवाद करते हैं।