प्रेस विज्ञप्ति

12 मार्च 2021
12-03-2021
12 मार्च 2021

चण्डीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा के वर्ष 2021-2022 के बजट अनुमान में कृषि एवं सम्बद्घ क्षेत्रों के लिए 6110 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव किया गया है। इसमें से 2998 करोड़ रुपये कृषि एवं किसान कल्याण। बजट अनुमान 2021-22 के लिए 6,110 करोड़ रुपये का परिव्यय संशोधन अनुमान 2021-22 के 5,052 करोड़ रुपये की तुलना में 20.9 प्रतिशत अधिक है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल, जो राज्य के वित्त मंत्री भी है, ने आज विधानसभा में बजट सत्र के दौरान वर्ष 2021-2022 के बजट प्रस्तुत करते हुए यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। हम किसानों की आय दोगुनी करने और उनका कल्याण व उत्थान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राज्य सरकार मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन-एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन; कीट प्रबंधन; गुणवत्तापरक आदानों की उपलब्धता; क्षारीय और लवणीय जल-भराव वाली मृदाओं का सुधार; जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण; जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस वर्ष ‘हर खेत-स्वस्थ खेत‘ नामक एक विशेष अभियान चलाने की घोषणा करते हुए उन्होंने इस अभियान में मृदा स्वास्थ्य और मृदा की गुणवत्ता के आधार पर फसल चयन की सुविधा उपलब्ध करवाने पर बल दिया जाएगा। पंजीकृत किसानों द्वारा फसल कीबिजाई की विस्तृत जानकारी ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर उपलब्ध करवाई जाएगी। ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर 9.14 लाख किसानों ने पंजीकरण करवाया है। अप्रैल, 2021 से प्रत्येक एकड़ के मृदा नमूनों के संग्रहण और जांच का कार्यक्रम बड़े पैमाने पर शुरू किया जाएगा और आगामी 3 वर्षों में राज्य के पूरे क्षेत्र को कवर किया जाएगा। किसानों को घर-द्वार पर मृदा जांच सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए मंडियों व सरकारी भवनों में 17 नई स्थैतिक मृदा जांच प्रयोगशालाएं और 59 मिनी-मृदा जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं।

किसानों और विज्ञान के विद्यार्थियों में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व के सम्बन्ध में जागरूकता बढ़ाने, विज्ञान के विद्यार्थियों को मृदा व पानी के नमूनों की जांच तथा उन्हें एक उद्यमी के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए, सरकार द्वारा उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करने की पहल की गई है। पहले चरण में, वर्ष 2020-21 के दौरान मृदा जांच प्रयोगशालाओं की स्थापना हेतु कुल 115 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों का चयन किया गया है। वर्ष 2021-22 के दौरान स्कूलों/कॉलेजों/तकनीकी विश्वविद्यालयों/संस्थानों में लगभग 125 मृदा जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। क्षारीय और लवणीय मृदा के उपचार हेतु योजना में किसानों की भागीदारी के लिए एक नया पोर्टल स्थापित किया जाएगा। वर्ष 2021-22 में कम से कम एक लाख एकड़ भूमि सुधार का प्रस्ताव है।

कृषि उत्पाद संगठनों की स्थापना और इसके तंत्र का विस्तार करना सरकार की एक और प्राथमिकता है। सरकार का मार्च, 2021 तक 500 किसान उत्पादक संगठन स्थापित करने का लक्ष्य है जिसके विरूद्ध 486 किसान उत्पादक संगठन बनाए जा चुके है और मार्च, 2022 तक 1,000 किसान उत्पादक संगठन स्थापित किए जांएगे। उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए फसल समूह विकास कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने खरीफ, 2020 से एक संशोधित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अधिसूचित की है। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। अलग-अलग किसानों को सब्सिडी पर 10,042 मशीनें प्रदान की गईं और 1345 कस्टम हायरिंग सेंटर खोले गए। इस वर्ष फसल अवशेषों के उपयोग के लिए प्रदेष में पेट्रोलियम मंत्रालय के सहयोग से 100 कंप्रेस्ड बायो गैस तथा बायो मास प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन बायो गैस और बायो मास संयंत्रों आदि को धान के पुआल की आपूर्ति के लिए कैचमेंट एरिया उपलब्ध करवाने के लिए धान उत्पादक गांवों का मानचित्रण भी किया जा रहा है। फसल विविधीकरण और भूजल के किफायती प्रयोग के लिए ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना शुरू की गई है। तदनुसार, 97,000 एकड़ क्षेत्र को धान से अन्य फसलों जैसेकि-मक्का, कपास, बाजरा, दालों, सब्जियों,चना और चारा आदि के अधीन लाया गया है। सरकार द्वारा किसानों को प्रोत्साहन के रूप में या धान से अन्य वैकल्पिक फसलों के विविधीकरण के लिए 7000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी प्रदान की जा रही है।वर्ष 2021-22 के दौरान धान के अधीन का क्षेत्र 2 लाख एकड़ कम करने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने और उपभोक्ताओं को ताजा और प्रदूषण मुक्त कृषि उत्पाद उपलब्ध करवाने की पहल के रूप में हमारी सरकार जीरो बजट खेती, जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार किसान मित्र योजना नाम से एक नई योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना में बैंकों की सांझेदारी में राज्य में 1000 किसान एटीएम स्थापित करने की परिकल्पना की गई है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा रबी की फसलों-गेहूं, चना, सरसों और सूरजमुखी तथा खरीफ की फसलों-धान, बाजरा, मक्का, मूंग और मूंगफली पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रहा है। हरियाणा सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम प्लेटफार्म के माध्यम से खाद्यान्नों की खरीद को सुचारू बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप पारदर्शिता आई है और किसानों तथा अन्य हितधारकों के साथ बेहतर अंतरफलक स्थापित हुआ है।

सरकार मक्का, सूरजमुखी, मूंग, चना और मूंगफली की खरीद की अपनी नीति को जारी रखते हुए फसलों के विविधीकरण के लिए किसानों को प्रोत्साहन देना जारी रखेगी। सरकार कृषि उत्पाद के लिए अतिरिक्त भण्डारण क्षमता सृजित कर रही है। हमने इस वर्ष 6.60 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। भण्डारण क्षमता के निर्माण के लिए साइलो का उपयोग किया जाएगा।