प्रेस विज्ञप्ति

20 जून 2020
20-06-2020
20 जून 2020

  • चंडीगढ़, 20 जून- हरियाणा सरकार ने योग को हर व्यक्ति की जीवन शैली का हिस्सा बनाने के मकसद से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खोली जा रही योग एवं व्यायामशाओं में योग वालंटियर लगाने का निर्णय लिया है। ये योग वालंटियर जिला परिषदों के माध्यम से लगाए जाएंगे तथा उसी गांव या आसपास के गांवों के युवाओं को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।
  • यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा योग परिषद की एक समीक्षा बैठक लिया गया।
  • हरियाणा योग परिषद के चेयरमैन डॉ. जयदीप आर्य ने राज्य में चलाई जा रही योग गतिविधियों पर प्रस्तुतीकरण दिया तथा इन योग वालंटियर्स को लगाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। बैठक में इस बात की भी जानकारी दी गई कि इन योग वालंटियर्स की आयु-सीमा 18 से 35 वर्ष के बीच तथा शैक्षणिक योग्यता हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड या सीबीएसई से 10+2 पास होगी। इसके अलावा, इनके पास राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 16 संस्थानों में से किसी एक से योग में लेवल-1 या इसके समकक्ष कोर्स या किसी विश्वविद्यालय से एक वर्ष का डिप्लोमा होना चाहिए।
  • इन योग वालंटियर्स को हरियाणा कौशल विकास मिशन के तहत विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय, दुधौला, पलवल से नेचुरोपैथी या फिजियोथैरेपी में 3-3 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स भी करवाया जाएगा ताकि योग एवं व्यायामशाओं में सुबह-शाम 2-2 घन्टे योग सिखाने के बाद इनसे आयुष विभाग द्वारा बनाए जा रहे हैल्थ एंड वैलनेस सेंटर में आयुष सहायक के रूप में काम लिया जा सके। इस प्रकार उनसे 8 घन्टे की ड्यूटी ली जा सकेगी और शुरू में इनका मानदेय न्यूनतम 11 हजार रुपये होगा।
  • बैठक में इस बात का भी निर्णय लिया गया कि इन योग वालंटियर्स के कामकाज की निगरानी के लिए नियमित भर्ती होने तक हर जिले में आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत आयुष कोच भी लगाए जाएंगे। इनके लिए शैक्षणिक योग्यता वही रहेगी, जो खेल एवं युवा मामले विभाग द्वारा योगा कोच के लिए निर्धारित की गई है।
  • मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को इस बात के निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही योग एवं व्यायामशालाओं के कार्य में तेजी लाई जाए। इस पर मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि प्रथम चरण में ऐसी 1000 व्यायामशालाओं के निर्माण का कार्य जारी है जिनमें से 599 का कार्य पूरा हो चुका है तथा लगभग 150 का कार्य अंतिम चरण में है ।
  • बैठक में मुख्यमंत्री को इस बात की भी जानकारी दी गई कि आयुष विभाग का कार्य धीरे-धीरे जिला परिषदों को स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे पूर्व भी उनके निर्देशानुसार पीएचसी व सीएचसी के भवनों की मरम्मत तथा बस क्यू शैल्टर के निर्माण समेत कुछ अन्य विभागों के कार्य भी जिला परिषदों को सौंपे जा चुके हैं। इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में हैल्थ एंड वैलनेस सेंटर भी जिला परिषदों को सौंपे जाएंगे। इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि प्रशासनिक स्तर पर इन कामों की सही मॉनिटरिंग के लिए हरियाणा सिविल सेवा के अधिकारियों को जिला परिषदों का अलग से मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है।
  • बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजीव अरोड़ा, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव श्री सुधीर राजपाल तथा आयुष विभाग के महानिदेशक श्री अतुल कुमार के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
     
  • चंडीगढ़, 20 जून- हरियाणा सरकार ने प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एलोपैथिक) स्तर पर आयुष सुविधाओं का विस्तार करने के उद्देश्य से 419 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 419 आयुष चिकित्सकों, 419 आयुष फार्मासिस्ट, 419 सेवादारों और इतने ही अंशकालिक स्वीपरों के पद सृजित करने का निर्णय लिया है।
  • मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन पदों के सृजन के साथ-साथ आबंटित की जा सकने वाली स्कीम के क्रियान्वयन हेतु वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 36,45,13,000 रुपये के बजट और बजट स्कीम का नाम ‘भवन निर्माण’ की बजाय ‘प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की स्थापना’ करने के आयुष विभाग के एक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
  • एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यह जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग से जुटाई गई नवीनतम जानकारी के अनुसार विभाग के तहत 528 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 131 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं। विभाग द्वारा इन 528 पीएचसी में से 109 पीएचसी में राष्टï्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत आयुष स्टाफ नियुक्त किया जा चुका है।
  • उन्होंने बताया कि भारत में विभिन्न समुदायों में सदियों से आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी (आयुष) चिकित्सा प्रणालियों की स्वीकार्यता रही है। जीवनशैली से जुड़े कई गम्भीर रोगों की रोकथाम और प्रबंधन में आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणालियों की अहम भूमिका है। जीवनशैली से जुड़े विकारों की संख्या बढऩे के साथ ही वैश्विक और राष्टï्रीय स्तर पर आयुष चिकित्सा प्रणालियों में लोगों का रूझान बढ़ा है। इसलिए आयुष प्रणाली को मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता है। इसके मुख्य धारा में आने से मरीजों को बीमारी के अनुसार चिकित्सा प्रणाली का चयन करने में आसानी होगी।